ट्रंप के बयान से बढ़ा न्यूक्लियर टेंशन, पुतिन ने भी दी टेस्टिंग की तैयारी के संकेत

वॉशिंगटन / मॉस्को | अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक बयान ने फिर से पूरी दुनिया में न्यूक्लियर टेंशन बढ़ा दिया है।
ट्रंप ने कहा है कि अब वक्त आ गया है जब अमेरिका को भी अपने न्यूक्लियर टेस्ट फिर से शुरू कर देने चाहिए, ताकि दुनिया के दूसरे देशों के साथ बराबरी की स्थिति बनी रहे।

उनके इस बयान के कुछ ही घंटों बाद, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अपने टॉप अधिकारियों को आदेश दिया कि वे न्यूक्लियर टेस्टिंग की संभावनाओं पर प्रस्ताव तैयार करें।

ट्रंप बोले – “America पीछे क्यों रहे ?

ट्रंप ने कहा कि, “जब बाकी देश टेस्ट कर रहे हैं, तो अमेरिका क्यों रुका रहे? हमें अपनी ताकत दिखानी होगी।”

उनका ये बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और रूस के बीच न्यूक्लियर टेस्ट बैन ट्रीटी (NTC) को लेकर तनाव पहले से ही बढ़ा हुआ है। ट्रंप के समर्थक इसे “strong leadership” बता रहे हैं, जबकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि ये कदम ग्लोबल पीस के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।

पुतिन का रिएक्शन – “रूस भी रहेगा तैयार”

ट्रंप के बयान के तुरंत बाद रूस की तरफ से सख्त प्रतिक्रिया आई।
राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अपने सलाहकारों से कहा है कि वो न्यूक्लियर टेस्ट दोबारा शुरू करने के प्लान पर रिपोर्ट तैयार करें। रूसी विदेश मंत्रालय ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ने असली न्यूक्लियर ब्लास्ट किया, तो इसका असर “बहुत नेगेटिव और खतरनाक” होगा।

दुनिया में बढ़ी चिंता

एनालिस्ट्स का कहना है कि अगर अमेरिका या रूस में से कोई भी देश टेस्ट दोबारा शुरू करता है, तो एक नई न्यूक्लियर आर्म्स रेस शुरू हो सकती है। इसका असर चीन, नॉर्थ कोरिया और पाकिस्तान जैसे देशों पर भी पड़ेगा, और ग्लोबल सिक्योरिटी पर बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।

1996 की न्यूक्लियर टेस्ट बैन ट्रीटी का बैकग्राउंड

साल 1996 में एक ग्लोबल एग्रीमेंट हुआ था —
Comprehensive Nuclear-Test-Ban Treaty (CTBT), जिसमें हर तरह के न्यूक्लियर टेस्ट पर रोक लगाने की बात कही गई थी। अमेरिका ने इस ट्रीटी को अभी तक रैटिफाई नहीं किया, जबकि रूस ने हाल ही में इसे सस्पेंड कर दिया है।

एक्सपर्ट्स क्या कहते हैं?

इंटरनेशनल स्ट्रैटेजिक एक्सपर्ट्स का कहना है कि ट्रंप का बयान असल में एक पॉलिटिकल मैसेज है — अगले अमेरिकी चुनाव से पहले “Strong America” की इमेज बनाने की कोशिश। वहीं, पुतिन का स्टेप एक स्ट्रैटेजिक काउंटर-मूव माना जा रहा है। “अगर दोनों देशों ने न्यूक्लियर टेस्टिंग फिर से शुरू की, तो ये 21वीं सदी की सबसे बड़ी स्ट्रैटेजिक अस्थिरता होगी।”
डॉ. ग्रेगोरी मिल्स, ग्लोबल पीस इंस्टीट्यूट

ट्रंप और पुतिन के इस “न्यूक्लियर टेस्टिंग वॉर ऑफ वर्ड्स” ने दुनिया को फिर से कोल्ड वॉर के दिनों की याद दिला दी है।
अब पूरी दुनिया की नज़र है कि क्या दोनों देश संयम दिखाएँगे या आने वाले वक्त में शुरू होगी एक नई न्यूक्लियर रेस।

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