नई दिल्ली/मस्कट, 12 जुलाई। ओमान के निकट समुद्री क्षेत्र में एक व्यापारिक जहाज पर हुए हमले के बाद उसमें कार्यरत भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। विदेश मंत्रालय ने रविवार को बताया कि जहाज पर सवार 11 भारतीयों में से 10 सुरक्षित हैं, जबकि एक भारतीय नागरिक अभी भी लापता है। उसकी तलाश के लिए स्थानीय एजेंसियां समुद्र में खोज एवं बचाव अभियान चला रही हैं।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि मस्कट स्थित भारतीय दूतावास घटना के बाद से ओमान के अधिकारियों, जहाज प्रबंधन और संबंधित समुद्री एजेंसियों के साथ लगातार संपर्क में है। लापता भारतीय का पता लगाने और अन्य भारतीयों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने के प्रयास जारी हैं।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, जहाज अपने निर्धारित समुद्री मार्ग से गुजर रहा था, तभी उस पर हमला हुआ। घटना के बाद चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित निकालने की कार्रवाई शुरू की गई। अधिकांश भारतीय सुरक्षित हैं, लेकिन एक सदस्य के बारे में अब तक कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिल सकी है।
हाल के सप्ताहों में पश्चिम एशिया के समुद्री क्षेत्र में सुरक्षा संबंधी घटनाओं में वृद्धि देखी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस क्षेत्र से होकर दुनिया के बड़े हिस्से का ऊर्जा और व्यापारिक परिवहन होता है। ऐसे में किसी भी प्रकार का हमला केवल एक जहाज तक सीमित नहीं रहता, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और आपूर्ति व्यवस्था पर भी असर डाल सकता है।
भारत ने इस घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना वैश्विक समुदाय की साझा जिम्मेदारी है। विदेश मंत्रालय ने दोहराया कि विदेशों में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है और पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर रखी जा रही है।
फिलहाल हमले के पीछे किसका हाथ है, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। जांच एजेंसियां घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही हैं। भारत सरकार ने कहा है कि जैसे ही लापता भारतीय नागरिक के संबंध में कोई नई जानकारी मिलेगी, उसे सार्वजनिक किया जाएगा।
ओमान और उसके आसपास का समुद्री क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय व्यापार की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी मार्ग से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल, गैस और अन्य आवश्यक वस्तुओं का वैश्विक परिवहन होता है। इसलिए इस क्षेत्र में होने वाली किसी भी सुरक्षा घटना पर दुनिया के अनेक देशों की नजर रहती है। ऐसे हालात में जहाजों की सुरक्षा और समुद्री मार्गों की निर्बाध आवाजाही अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए एक प्रमुख चुनौती बन जाती है।



