नई दिल्ली। देश में चीनी के दाम लगातार बढ़ने के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाने के लिए 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात को मंजूरी दी है।
सरकार का कहना है कि इस फैसले का मकसद बाजार में चीनी की कमी न होने देना और बढ़ती कीमतों पर काबू पाने की कोशिश करना है। यह फैसला ऐसे समय हुआ है जब त्योहारों का सीजन शुरू होने वाला है और बाजार में चीनी की मांग बढ़ने की उम्मीद है।
कुछ दिनों में तेजी से बढ़े दाम
पिछले कुछ दिनों में चीनी के दाम में तेजी देखी गई है। रिपोर्टों के मुताबिक, कई बड़े शहरों में 7 अगस्त के बाद खुदरा कीमतों में करीब 20 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई है।
चीनी महंगी होने का असर सिर्फ घर के बजट पर नहीं पड़ता। मिठाई की दुकान, बेकरी, कोल्ड ड्रिंक और दूसरी खाद्य चीजें बनाने वाले कारोबार पर भी इसका असर पड़ता है।
बड़े खरीदारों के स्टॉक पर भी नजर
सरकार ने सिर्फ आयात का फैसला नहीं किया है, बल्कि बड़े थोक खरीदारों के पास रखे चीनी के स्टॉक पर भी सीमा तय की है।
हर महीने 10 टन से ज्यादा चीनी इस्तेमाल करने वाले थोक उपभोक्ता अब अपनी जरूरत के 15 दिनों से ज्यादा का स्टॉक नहीं रख सकेंगे। इसका उद्देश्य बाजार में जरूरत से ज्यादा चीनी जमा करके रखने की स्थिति को रोकना है।
बाजार में कब दिखेगा असर?
सरकार के इस फैसले का असर तुरंत दिखाई देगा या नहीं, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि आयात की गई चीनी बाजार में कितनी जल्दी पहुंचती है। रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ खेप अक्टूबर के आसपास भारत पहुंच सकती हैं।
फिलहाल सरकार की कोशिश साफ है—बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहे और त्योहारों के दौरान कीमतों में ज्यादा तेजी न आए।
आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आयात के बाद घरेलू बाजार में चीनी के दाम कितने नीचे आते हैं।



