BRICS देशों की रणनीतिक साझेदारी में किसी भी प्रकार की बाधा की संभावना नगण्य है। अमेरिका द्वारा प्रस्तावित टैरिफ नीति को रूस ने समूह की संप्रभुता पर प्रत्यक्ष हमला बताया है, जो अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों के दृष्टिकोण से हस्तक्षेप की श्रेणी में आता है। रूस की विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता, मारिया ज़खारोवा, ने स्पष्ट किया कि रूस को वैश्विक दक्षिण के समान विचारधारा वाले देशों का तकनीकी एवं कूटनीतिक समर्थन प्राप्त है, जिससे बहुपक्षीय सहयोग को और अधिक सुदृढ़ किया जा सकेगा।
गुरुवार को रूस ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर आरोप लगाया कि भारत जैसे देशों पर मास्को के साथ व्यापारिक संबंध समाप्त करने हेतु अवैध दबाव डाला जा रहा है। ट्रंप द्वारा रूसी ऊर्जा के आयात पर भारतीय वस्तुओं पर अतिरिक्त शुल्क लगाने की चेतावनी इस संदर्भ में आई थी। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने कहा कि ऐसे बयान, जो देशों को रूस के साथ व्यापारिक संबंध समाप्त करने के लिए बाध्य करने का प्रयास करते हैं, किसी भी वैधानिकता के दायरे में नहीं आते। उनका कहना था कि संप्रभु राष्ट्रों को स्वतंत्र रूप से अपने व्यापारिक एवं आर्थिक सहयोगी चयन करने का अधिकार है, और यह अधिकार अंतरराष्ट्रीय कानूनों द्वारा संरक्षित है।
मारिया ज़खारोवा ने पुनः उल्लेख किया कि अमेरिका की टैरिफ नीति, BRICS देशों के आंतरिक मामलों में अनुचित हस्तक्षेप है। उन्होंने यह भी कहा कि रूस को वैश्विक दक्षिण के देशों का तकनीकी एवं राजनीतिक सहयोग प्राप्त है, जिससे द्विपक्षीय और बहुपक्षीय साझेदारी को और गहरा किया जा सकता है। उनका मानना है कि कोई भी टैरिफ युद्ध या प्रतिबंध, वैश्विक आर्थिक प्रक्रियाओं के स्वाभाविक विकास को रोक नहीं सकता। BRICS समेत कई साझेदार देश रूस के इस दृष्टिकोण का समर्थन करते हैं।
भारत ने भी स्पष्ट रूप से अमेरिका और यूरोपीय संघ की उस नीति का विरोध किया, जिसमें रूस के साथ ऊर्जा संबंध बनाए रखने पर भारत को निशाना बनाया गया। भारत की यह प्रतिक्रिया ट्रंप द्वारा रूसी तेल आयात पर शुल्क बढ़ाने की धमकी के बाद आई, जिसमें भारत ने अपनी ऊर्जा नीति की स्वतंत्रता पर जोर दिया।
इस प्रकार, BRICS देशों की साझेदारी और उनके स्वतंत्र नीति निर्धारण की प्रक्रिया वर्तमान वैश्विक आर्थिक-राजनीतिक परिदृश्य में किसी भी बाहरी दबाव के बावजूद सुदृढ़ बनी हुई है।



