इस बार काशी में सावन का माहौल कुछ और ही है। मंदिर में तैयारियां फुल-ऑन चल रही हैं, मानो एक करोड़ से भी ज्यादा लोग आने वाले हों – और सच बताऊं, आएंगे भी! चार सोमवार हैं इस बार, और हर सोमवार बाबा का अलग-अलग शृंगार होगा। भक्तों में एक्साइटमेंट तो पूछो ही मत।
अब बात एंट्री की करें तो मंदिर में जाने के लिए आपको गेट नंबर 4, नंदू फारिया, सिल्को गली, ढुंढिराज या सरस्वती फाटक से घुसना पड़ेगा। ललिता घाट से एंट्री? भूल जाओ, गंगा में बाढ़ आई तो वहाँ से आना टेम्पररी बैन कर देंगे। और हां, जो बुजुर्ग हैं, बच्चे या दिव्यांग – उनके लिए गोदौलिया से मैदागिन तक फ्री ई-रिक्शा का सेटअप है। सो, थोड़ा सहूलियत मिलेगी।
खास बात – इस बार कोई वीआईपी-वीवीआईपी लफड़ा नहीं। न कोई प्रोटोकॉल दर्शन, न कोई चुपके से लाइन काटने वाला। सबको लाइन में लगना है, चाहे जो भी हो। कोई आपको बोले कि “भाई, मेरी दुकान से प्रसाद ले लो, मैं दर्शन करवा दूँगा” – तो समझो बेवकूफ बना रहा है। पुलिस या मंदिर के स्टाफ को तुरंत बताओ, वरना आपका पैसा गया समझो।
मंदिर ट्रस्ट ने ये भी बोला है कि खाली पेट कतार में मत लगना, वरना लाइन में ही चक्कर आ जाएगा। वैसे भी, भीड़ बहुत है – अपनी सेहत का ख्याल रखना ज़रूरी है।
अब शृंगार की बात करें तो 14 जुलाई को पहला सोमवार – चल प्रतिमा शृंगार। 21 जुलाई को गौरी-शंकर, तीसरे सोमवार 28 जुलाई को अर्धनारीश्वर, और चौथे सोमवार यानी 4 अगस्त को रुद्राक्ष शृंगार। नौ अगस्त को पूर्णिमा पर झूला शृंगार भी होने वाला है। मतलब हर सोमवार कुछ नया, कुछ स्पेशल।
डिजिटल दर्शन भी मिलेंगे – मतलब अगर भीड़ में टिकना मुश्किल लगे तो शहर के अलग-अलग हिस्सों में लगे स्क्रीन पर बाबा की आरती और शृंगार लाइव देख सकते हो। यूट्यूब चैनल पर भी ऑनलाइन स्ट्रीमिंग रहेगी – आस्था के साथ टेक्नोलॉजी का तड़का, समझे?
मेडिकल इमरजेंसी की चिंता मत करो – पांच जगहों पर डॉक्टरों की टीम तैनात रहेगी। तीन-तीन शिफ्ट में डॉक्टर्स, दो-दो एंबुलेंस (एक तो एडवांस लाइफ सपोर्ट वाली भी), यानी कुछ भी हो गया तो तुरंत मदद मिलेगी।
भीड़ में अगर कोई खो जाए? नो टेंशन! छह जगहों पर खोया-पाया केंद्र हैं – मंदिर प्रांगण, शंकराचार्य चौक, गेट नंबर 1, गेट नंबर 2, गेट नंबर 4 और ललिता घाट। खो गए तो वहीं पहुंचो, फैमिली मिल जाएगी।
और हां, प्यास लगे तो पेयजल काउंटर, ओआरएस, बिस्किट, टॉफी-चॉकलेट – सबका इंतजाम है। बुजुर्ग हों या बच्चे, किसी को दिक्कत न हो – यही कोशिश है।
तो कुल मिलाकर, सावन में काशी विश्वनाथ धाम – भीड़, आस्था, इंतजाम, और भक्तों की उम्मीदों का तगड़ा मिक्स। तैयार रहना, इस बार भीड़ का लेवल कुछ और ही होगा!
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