दिल्ली में आजकल जो पेड़ों की कटाई मची है, उस पर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने सच में तगड़ा बवाल काट दिया। उन्होंने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और पूरी बीजेपी सरकार पर सीधा तीर चलाया—मतलब, पेड़ काटने के नाम पर जो तबाही हो रही है, उसे ‘विकास’ की आड़ में विनाश करार दिया। और भाई, ये लाइन तो मानो मोदी जी के पोस्टर पर लाल रंग से लिख दी—”विकास के नाम पर विनाश”।
अब देखो, यादव जी ने बीजेपी की डबल गेम का भी पोल खोल दिया। बोले—एक तरफ राजधानी में पेड़ों का कत्लेआम चल रहा है, दूसरी तरफ रेखा गुप्ता जी कैमरे के सामने ‘एक पेड़ माँ के नाम’ और ‘वृक्षारोपण अभियान 2025’ जैसे इवेंट करा रही हैं। सब दिखावा है, सब नौटंकी—ये उनका कहना था।
यादव ने पुराने मामले भी याद दिलाए—कस्तूरबा नगर फेज-2 में सरकारी मकानों के लिए 856 पेड़ों की कटाई और ट्रांसप्लांटेशन की इजाजत मिली थी, उस पर भी बवाल काटा था। बोले—ये तो बस शुरुआत है, आगे-आगे देखो, हजारों पेड़ कटेंगे। दिल्ली वैसे ही दुनिया की सबसे प्रदूषित राजधानी है, और बीजेपी का एजेंडा साफ है: ‘झुग्गी हटाओ, पेड़ काटो, बिल्डिंग बनाओ’। क्या गजब प्लानिंग है!
अब ताजा अपडेट सुन लो—यादव जी ने आंकड़े रख दिए टेबल पर:
- नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के री-डेवलपमेंट में 887 पेड़ों की बलि चढ़ेगी,
- मौलाना आजाद रोड पर नई सरकारी बिल्डिंग के लिए 476 पेड़ कटेंगे,
- नेताजी नगर में 501 पेड़ों की छुट्टी हो चुकी है, उपराज्यपाल ने परमिशन दे ही दी।
इतना ही नहीं, उन्होंने आरोप लगाया कि पीएम आवास के आसपास अफसरों के लिए गगनचुंबी फ्लैट्स बन रहे हैं, और गरीबों की झुग्गियां धड़ल्ले से हटवाई जा रही हैं। और आम जनता—उन पर प्रदूषण के नाम पर रोज नए नियम लाद दिए जाते हैं! बोले, 2019 से 2021 तक केजरीवाल सरकार में हर घंटे पांच पेड़ कटे—मतलब, दिल्ली की हवा का दम घुटना लाजिमी है।
यादव ने फिर डिमांड दोहराई—ट्री सेंसस हो, जनसुनवाई हो, रीयल ऑडिट हो, बिना इन सबके एक भी पेड़ मत काटो। सुप्रीम कोर्ट की भी याद दिलाई—पेड़ काटना, मतलब इंसान मारना। बोले, अगर बीजेपी सरकार ने अपनी हरकतें नहीं सुधारीं, तो कांग्रेस सड़क पर उतरकर आंदोलन करेगी।
सीधी बात—यादव का कहना है, दिल्ली की आत्मा झुग्गियों में है, इसकी सांसें पेड़ों में हैं। दोनों मिटा दिए, तो दिल्ली कंक्रीट का कब्रिस्तान बन जाएगी।



