अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच 15 अगस्त 2025 को अलास्का (Anchorage) में एक अहम बैठक होने जा रही है। यह बातचीत सिर्फ अमेरिका-रूस के रिश्तों के लिए ही नहीं, बल्कि भारत के आर्थिक भविष्य के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
अलास्का की बैठक भारत के लिए बेहद अहम है
अमेरिकी टैरिफ भारत की अर्थव्यवस्था पर सीधा असर डाल सकते हैं
भारत अब रूस, ब्राजील और चीन के साथ रणनीतिक रिश्ते मजबूत कर रहा है
इस मुद्दे पर आने वाले हफ्ते भारत की विदेश नीति के लिए निर्णायक साबित हो सकते हैं
भारत पर क्यों है खतरा?
अगर यह मीटिंग असफल होती है, तो अमेरिका भारत पर और ज्यादा टैरिफ (Import Tax) लगा सकता है। अभी भारत से अमेरिका को होने वाले कुछ एक्सपोर्ट पर 50% तक टैक्स लग चुका है—जिसमें 25% रूस से तेल और हथियार खरीदने की वजह से, और 25% जवाबी कार्रवाई के तहत लगाया गया है।
इससे भारत के कई उद्योग जैसे:
- कपड़ा (Textiles)
- हीरे-जेवर (Jewelry)
- दवाइयां (Pharmaceuticals)
को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
भारत की तैयारी
भारत ने अमेरिका के दबाव को देखते हुए अब रूस और चीन जैसे देशों से संबंध मजबूत करना शुरू कर दिया है। हाल ही में:
- NSA अजित डोभाल ने व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की
- PM मोदी और ब्राजील के राष्ट्रपति लूला के बीच भी लंबी बातचीत हुई
यह दर्शाता है कि भारत अब अपने रणनीतिक फैसले खुद लेना चाहता है, किसी दबाव में नहीं।
क्या हो सकता है नतीजा?
अगर ट्रंप-पुतिन की यह मीटिंग सफल होती है, तो हो सकता है भारत पर लगे भारी टैक्स में कुछ राहत मिले।
लेकिन अगर वार्ता बिगड़ गई, तो भारत पर नए और कड़े टैक्स लग सकते हैं। इससे न केवल भारतीय कारोबार प्रभावित होंगे, बल्कि भारत-अमेरिका के रिश्तों में भी खटास आ सकती है।