नई दिल्ली | केंद्र सरकार की नई यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) कर्मचारियों को पसंद नहीं आई। 30 लाख से ज़्यादा योग्य कर्मचारियों में से केवल 70,670 ने इसे अपनाया।
क्या हुआ?
UPS अप्रैल 2025 में शुरू हुई थी। मक़सद था NPS और OPS के बीच संतुलन देना। कर्मचारियों को 1 अप्रैल से 30 जून तक स्विच करने का मौका मिला।
लेकिन इस दौरान सिर्फ़ 31,555 ने इसे अपनाया।
कम रिस्पॉन्स देखकर सरकार ने डेडलाइन बढ़ाकर 30 सितम्बर कर दी, पर ज़्यादा फर्क नहीं पड़ा।
विभागवार आंकड़े
- सिविल विभाग: 21,366
- डाक विभाग: 9,996
- टेलीकॉम: 130
- रेलवे: 18,024
- रक्षा (सिविलियन): 7,058
कर्मचारियों और यूनियनों की राय
बड़ी यूनियनों जैसे AIDEF, Confederation और रेलवे यूनियन ने UPS को “फ्लॉप” कहा।
S. K. श्रीधर कुमार, AIDEF सेक्रेटरी:
“UPS की शर्तें कठिन हैं। 25 साल की सर्विस की जरूरत ने कई लोगों को रोक दिया। कई कर्मचारी इसे अपनाने के बाद पछता रहे हैं।”
S. B. यादव, Confederation लीडर:
“अगर सरकार OPS वापस नहीं लाती, तो यूनियनों को सख़्त कदम उठाने पड़ सकते हैं।”
UPS न तो OPS जैसी पेंशन गारंटी देती है, न ही NPS जैसी फ्लेक्सिबिलिटी।
इसलिए कर्मचारियों का भरोसा इस योजना पर नहीं बन पाया।
सरकार के लिए यह चेतावनी है: पेंशन नीति पर फिर से सोचना होगा। OPS की मांग अनसुनी रही, तो आने वाले महीनों में बड़े आंदोलन की संभावना है।



