महाराष्ट्र की पॉलिटिक्स में शनिवार को पूरा बवाल मच गया। मतलब, जिसने भी ये सोचा था कि राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे कभी साथ बैठेंगे – उसने शायद IPL में RCB की जीत पर भी भरोसा कर लिया होगा! बहरहाल, दोनों मुंबई के वर्ली में NSCI डोम में पहुंचे, ‘विजय रैली’ नाम से भीड़ जुटाई और तीन-भाषा नीति की वापसी पर तगड़ा जश्न मनाया।
अब, चिराग पासवान ने भी मौके पर तंज कसना नहीं छोड़ा। बोले, “भाई लोग भाषा के लिए नहीं, अपनी दुकान बचाने के लिए साथ आए हैं। अलग-अलग रहे तो दोनों की हालत पतली हो गई, अब समझ आ गया कि अकेले कुछ नहीं कर सकते। मुझे तो नहीं लगता दिल से गले मिले होंगे, बस सत्ता की भूख सब करवा देती है!”
इधर, दूसरी तरफ, मनसे फॉलोअर्स ने निवेशक सुशील केडिया के ऑफिस में तोड़फोड़ कर डाली। वजह? उसने राज ठाकरे को चैलेंज किया था, बोला था- “मराठी नहीं सीखूंगा, कर लो जो करना है!” सोशल मीडिया पर धमकी मिली, बेचारा सीधा पुलिस के पास पहुंचा। सुबह कुछ लोग ऑफिस में घुसे, पत्थर फेंके, ‘राज ठाकरे जिंदाबाद’ के नारे लगे। केडिया अब भी अड़ा हुआ- “जब तक तुम लोग मराठी की ठेकेदारी करोगे, मैं मराठी नहीं सीखूंगा। क्या करोगे?”
वर्ली डोम में रैली जबरदस्त थी। उद्धव ठाकरे, राज ठाकरे, सुप्रिया सुले, जितेंद्र अव्हाड – सारे बड़े चेहरे एक ही मंच पर। बेटा पार्टी का, बाप पार्टी का – आदित्य ठाकरे और अमित ठाकरे भी मौजूद। सब एक ही बात पर एकजुट – हिंदी को तीसरी भाषा बनाने वाली GRs को सरकार ने कैंसिल कर दिया, तो रैली में खुशी का माहौल ही अलग था।
राज ठाकरे ने भी माइक पकड़ा और बोला, “गुजराती हो या कोई और, मराठी आनी चाहिए। नहीं आती तो मारने की जरूरत नहीं, लेकिन ड्रामा करेगा तो एक कान के नीचे जरूर पड़ेगा! और हां, किसी को पीटो तो वीडियो मत बनाओ, सीधा उसे समझाओ। सबको बताने की क्या जरूरत?”
राज ने ये भी बोला, “महाराष्ट्र मेरी जान है, यहां की राजनीति और झगड़े से बड़ा है ये राज्य। देखो, 20 साल बाद मैं और उद्धव साथ हैं। जो बालासाहेब नहीं कर पाए, वो फडणवीस ने करवा दिया – हमें साथ ला दिया!”
तो कुल मिलाकर, महाराष्ट्र की पॉलिटिक्स में नया ट्विस्ट आ गया है। कौन किसका दोस्त, कौन दुश्मन – समझना मुश्किल है, लेकिन रैली में जोश हाई लेवल पर था। आगे क्या होगा? भई, ये तो महाराष्ट्र की राजनीति है, कल क्या हो जाए – किसे पता!
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