भोपाल। मध्य प्रदेश में तबादलों को लेकर सरकार के भीतर खींचतान सामने आई है। कई मंत्रियों का आरोप है कि उनकी मंजूरी के बाद भी विभागीय अधिकारियों ने तबादला सूची में बदलाव कर दिए। कुछ विभागों में स्वीकृत सूची के बावजूद आदेश जारी नहीं होने की भी शिकायत है।
तबादला अवधि खत्म होने से पहले मंत्रियों ने अपने-अपने विभागों की सूची पर मंजूरी देकर उसे जारी करने के लिए भेज दिया था। लेकिन अंतिम आदेश जारी होने तक कई नाम बदल गए। इसी को लेकर कुछ मंत्रियों ने सरकार के शीर्ष स्तर पर अपनी नाराजगी जताई है।
सबसे ज्यादा चर्चा उद्यानिकी विभाग की है। बताया जा रहा है कि मंत्री नारायण सिंह कुशवाहा की मंजूर तबादला सूची जारी नहीं हुई। मामला मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और मुख्य सचिव अनुराग जैन तक पहुंचा, जिसके बाद इसकी जानकारी सरकार के भीतर भी चर्चा का विषय बन गई।
महिला एवं बाल विकास विभाग में भी इसी तरह की स्थिति बताई जा रही है। मंत्री की स्वीकृति के बाद तैयार सूची और जारी आदेशों में अंतर होने की बात सामने आई है। आरोप है कि अंतिम आदेश जारी होने से पहले कई अधिकारियों और कर्मचारियों के नाम सूची से हटा दिए गए।
राजस्व विभाग में भी तबादलों को लेकर सवाल उठे हैं। सूत्रों का कहना है कि मंत्री करण सिंह वर्मा की मंजूर सूची में भी अंतिम समय पर बदलाव किए गए। इसे लेकर विभाग के भीतर नाराजगी की चर्चा है।
इन घटनाओं के बाद कई विधायक और जनप्रतिनिधि भी असंतुष्ट बताए जा रहे हैं। उनका कहना है कि जिन नामों की सिफारिश की गई थी, वे अंतिम सूची में जगह नहीं बना सके। कर्मचारियों के बीच भी तबादलों को लेकर लगातार चर्चा बनी हुई है।
अब प्रदेश में तबादलों पर दोबारा प्रतिबंध लागू हो चुका है। ऐसे में आगे होने वाले किसी भी तबादले के लिए मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव की मंजूरी जरूरी होगी। इस बीच, तबादला सूची में कथित बदलाव को लेकर उठे सवालों पर सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।



