भोपाल – मध्य प्रदेश की SEIAA में तो गजब खेल चल रहा था! 2013 बैच की IAS अफसर आर. उमा महेश्वरी पर ये आरोप है कि उन्होंने बिना कोई औपचारिक मीटिंग किए, 450 से ज़्यादा प्रोजेक्ट्स को Environmental Clearance ठोक दिया। सीधा बैकडोर एंट्री, मीटिंग-वेटिंग सब हवा में!
अब मामला क्या है असल में?
28 मार्च से 21 अप्रैल 2025 – इस एक महीने में एक भी SEIAA की बैठक नहीं हुई। लेकिन इसी दौरान, उमा महेश्वरी ने सैकड़ों प्रोजेक्ट्स को ग्रीन सिग्नल दे दिया। और ये सब कैसे? नियम का खेल! 45 दिन में फैसला नहीं लिया तो प्रोजेक्ट “deemed approved” – बस, इसी loophole में से 450 प्रोजेक्ट्स को पास कर दिया। मजेदार बात, इनमें 200 तो सीधा खनन से जुड़े हैं। सोना-चांदी नहीं, मिट्टी-पत्थर वाले प्रोजेक्ट्स।
शिकायत-विकायत और हंगामा
SEIAA के चेयरमैन शिवनारायण सिंह चौहान इतने भड़के कि सीधा केंद्र सरकार को चिट्ठी ठोक दी – बोले, ये सीधा-सीधा भ्रष्टाचार है। जून में चीफ सेक्रेटरी अनुराग जैन ने EPCO को एक्शन के लिए बोला। IAS आलोक नायक को हटाकर मनोज पटेल को इंचार्ज बना दिया। अब उमा महेश्वरी की भी शामत आ सकती है – इंतजार की घड़ियां शुरू।
कानूनी पेंच
Environment Protection Act 1986 – नाम बड़ा, काम बड़ा। इसमें ऐसे खेल पकड़े जाएं तो सीधा 5 साल की जेल या 1 लाख का फाइन, और रोज़-रोज़ का जुर्माना अलग से। तो हंसी-मजाक करने का सवाल ही नहीं।
चेयरमैन बोले क्या?
जून 2024 में SEIAA का कार्यकाल ही खत्म हो गया था, 6 महीने तक कोई नया मेंबर नहीं बना। जनवरी 2025 में नई टीम आई, लेकिन चार महीने में सिर्फ दो ही मीटिंग हुई। मई में 14 बार मीटिंग बुलाने की कोशिश हुई, लेकिन एक ही हो पाई – फिर भी प्रोजेक्ट्स पास होते रहे। मतलब, सिस्टम का मजाक बन गया।
IAS उमा महेश्वरी का जवाब?
उनका कहना है – “सीनियर अफसरों को मैंने सब बता रखा था, और DoPT से अब तक कोई नोटिस नहीं मिला। नोटिस आएगा तो जवाब दूंगी।” यानी, फिलहाल टेंशन नहीं है – लेकिन आगे क्या होगा, भगवान ही जाने।
टेकअवे? 45 दिन वाली “deemed approval” पॉलिसी का जमकर फायदा उठाया गया, बिना मीटिंग हुए सैकड़ों प्रोजेक्ट्स साइन हो गए। अब मामला केंद्र के पास और जांच एजेंसियों के चंगुल में है। असली मजा तो अब आएगा!



