भाई, ये दिल्ली यूनिवर्सिटी की फीस बढ़ोतरी तो सच में सिर पकड़ लेने वाली बात है। देवेंद्र यादव ने सही पकड़ा—बीजेपी सरकार ने जैसे ठान ही लिया है कि गरीब और मिडिल क्लास के बच्चों को पढ़ने ही नहीं देना। हर साल यूनिवर्सिटी डेवलपमेंट फंड, सुविधा और सर्विस चार्ज के नाम पर नई-नई वसूली शुरू हो जाती है। पिछले तीन साल में फीस डबल? मतलब मज़ाक चल रहा है क्या? टीचर्स भी बोले जा रहे हैं कि ये गलत है, फिर भी कोई सुनता ही नहीं।
सरकार तो कहती थी “केजी से पीजी तक फ्री एजुकेशन”—अब सब हवा हो गया। दिल्ली के प्राइवेट स्कूलों में फीस बढ़ी, उस पर भी कुछ नहीं किया। अब यूनिवर्सिटी में भी वही हाल। सोचो, 20% फीस बढ़ा दी, बच्चों पर एक्स्ट्रा बोझ। 2025 में डेवलपमेंट फंड और सर्विस चार्ज—1500-1500 रुपए अलग से, मतलब 3000 रुपए का झटका। ये गरीब, दलित, महिलाएं, किसान, मज़दूर, अल्पसंख्यक, ईडब्ल्यूएस, सब पर सीधा असर डालेगा। बीजेपी को तो जैसे गरीबों के बच्चों से कोई लेना-देना ही नहीं।
और प्राइवेट कॉलेजों की फीस तो पहले से आसमान छू रही है, गरीब आदमी का बच्चा तो सपने में भी नहीं सोच सकता वहाँ पढ़ने का। अब यूनिवर्सिटी में भी हर साल फीस बढ़ती जा रही है। “पढ़ेगा इंडिया तभी बढ़ेगा इंडिया”—ये नारा अब बस पोस्टर और भाषणों में ही अच्छा लगता है। असल में तो आम आदमी अपना बच्चा पढ़ा ही नहीं सकता इस रफ्तार से।
सबसे बुरा असर लड़कियों पर पड़ेगा। अभी भी लोगों की सोच है—बेटी की जगह बेटे को पढ़ाओ। अब फीस बढ़ गई तो और कौन पढ़ाएगा बेटियों को? “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ”—ये भी बस जुमला बनकर रह गया। गरीब परिवार की लड़कियों का कॉलेज जाने का सपना तो सीधा-सीधा तोड़ दिया है बीजेपी ने।
कॉलेजों को भी मजबूर कर दिया—जाओ हायर एजुकेशन फाइनेंसिंग एजेंसी के पास, वरना डेवलपमेंट फंड और सर्विस चार्ज के नाम पर बच्चों से और पैसा वसूलो। यूनिवर्सिटी खुद कोई ढंग की इन्फ्रास्ट्रक्चर देती नहीं, सारा बोझ बच्चों के सिर पर डाल देती है।
अब देखो, बीटेक, बीए, बीकॉम, पीएचडी—हर कोर्स की फीस में अलग-अलग रेट से बेतहाशा बढ़ोतरी। बीटेक की फीस 2.16 लाख से 2.24 लाख, वो भी एक साल में। पीएचडी वालों की तो हालत ही खराब—60% से ऊपर फीस बढ़ गई! क्या ही बोलें अब—पढ़ाई अब बस अमीरों का खेल बन गई है, बाकी लोग तो बस सपना ही देख सकते हैं।



