डॉ. मधवानंद कर अब AIIMS भोपाल की कमान संभाल रहे हैं, और इस बार वे पूरी तरह एक्शन में हैं। जिस तरह कैंसर धीरे-धीरे शरीर को खोखला करता है, वैसे ही कुछ सालों से AIIMS भोपाल में भी सिस्टम की बीमारी फैल रही थी। अब डॉ. कर ने साफ कर दिया है—इस बीमारी को जड़ से खत्म करना है, चाहे वो प्रशासनिक लापरवाही हो या मरीजों की अनदेखी।
सर्जिकल ऑन्कोलॉजी के माहिर, और मेडिकल एडमिनिस्ट्रेशन में लंबा अनुभव रखने वाले डॉ. कर, फिर से AIIMS भोपाल लौटे हैं। पिछली बार जब वे आए थे, तब हालात कुछ खास नहीं थे। कई विभागों में अफसर मनमर्जी से काम कर रहे थे। ढीलापन हर जगह था। उस दौर में डॉ. कर नाम के लिए तो हेड थे, लेकिन असल फैसले कहीं और होते थे। उन्होंने उस वक्त संस्थान को समझने और खुद को सिस्टम में ढालने में वक्त लगाया।
अब एक्सटेंशन मिलने के बाद, उनका रुख ही बदल गया है। साफ कह दिया है—अब सब कुछ मरीजों के हिसाब से चलेगा, और हर नियम-कायदा, हर छोटी-बड़ी प्रक्रिया पर खुद नजर रखेंगे। जहां गड़बड़ी दिखी, तुरंत दखल दिया। Ministry ने उन पर भरोसा जताया, और डॉ. कर ने दिखा दिया कि वे उस भरोसे पर पूरी तरह खरे हैं। धीरे-धीरे AIIMS भोपाल की फिजा बदल रही है।
कैंसर सर्जरी के क्षेत्र में डॉ. कर का नाम पहले ही बड़ा है। MD Anderson, Memorial Sloan Kettering, और Royal Marsden जैसे इंटरनेशनल इंस्टिट्यूट्स में काम कर चुके हैं। AIIMS भुवनेश्वर में भी लीडरशिप का मजबूत ट्रैक रिकॉर्ड है। अब AIIMS भोपाल के मरीज इस अनुभव का सीधा फायदा देखेंगे ।
आगे डॉ. कर का लक्ष्य बिलकुल साफ है—AIIMS भोपाल को ऐसा संस्थान बनाना जहां कोई गड़बड़ी न रहे, मरीजों की सेवा सबसे ऊपर हो, और शिक्षा-शोध में यह संस्थान मिसाल बने। Ministry का भरोसा और खुद की जिम्मेदारी—इन दोनों को लेकर वे जुटे हैं AIIMS को नई ऊंचाई पर लाने में।



