मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध कान्हा टाइगर रिजर्व में हाल ही में तीन बाघों की मौत हो गई। इसमें एक वयस्क बाघ और दो मादा शावक शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार, इन मौतों का कारण बाघों के बीच क्षेत्रीय संघर्ष (territorial fight) है।
बाघों की मौत के कारण
- बालाघाट मेल टाइगर: यह बाघ लगभग 8 से 10 साल पुराना था और 170 से 180 किलोग्राम वजन का था। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में पाया गया कि इसकी गर्दन में गंभीर घाव थे, जो किसी अन्य बाघ से लड़ाई के दौरान हुए थे। अधिकारियों का मानना है कि यह बाघ बफर क्षेत्र में घूम रहा था और मुख्य क्षेत्र में भटककर किसी अन्य बाघ के क्षेत्र में पहुंच गया, जिससे उसकी मौत हुई।
- दो मादा शावक: यह शावक लगभग 1 से 2 महीने के थे। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में पाया गया कि उनकी मौत भी किसी अन्य बाघ के हमले से हुई थी। इन शावकों के पास एक वयस्क बाघ की लाश भी मिली थी, जो संभवतः उनकी मां रही होगी।
अधिकारी क्या कहते हैं?
कान्हा टाइगर रिजर्व के अधिकारियों का कहना है कि बाघों के बीच क्षेत्रीय संघर्ष एक सामान्य प्राकृतिक प्रक्रिया है। हालांकि, इन मौतों से वन्यजीव संरक्षण प्रयासों को झटका लगा है, लेकिन अधिकारियों का मानना है कि यह घटनाएँ बाघों के प्राकृतिक व्यवहार का हिस्सा हैं।
पर्यावरणीय प्रभाव
इन घटनाओं से यह स्पष्ट होता है कि कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या बढ़ने के साथ-साथ उनके बीच क्षेत्रीय संघर्ष भी बढ़ रहे हैं। यह वन्यजीव संरक्षण के लिए एक चुनौती प्रस्तुत करता है, क्योंकि बाघों के बीच संघर्ष से उनकी संख्या में कमी आ सकती है और पारिस्थितिकी तंत्र पर भी प्रभाव पड़ सकता है।



