10 जून 2025 | नई दिल्ली
एक समय था जब बीमा पॉलिसी लेने के लिए केवल उम्र, मेडिकल इतिहास और डॉक्टरी रिपोर्ट देखी जाती थी। लेकिन अब बीमा कंपनियों की नजर आपके हर रोज के कदमों, आपकी नींद की आदतों और यहां तक कि आपकी हार्ट बीट पर भी है। और यह सब संभव हुआ है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की वजह से।
भारत में बीमा क्षेत्र में यह बदलाव इतनी तेजी से आ रहा है कि अब हर प्रमुख स्वास्थ्य बीमा कंपनी जैसे कि Star Health, HDFC ERGO, Niva Bupa और Aditya Birla Health अपनी नीतियों को टेक्नोलॉजी से जोड़ने की दौड़ में लगी हैं।
उपकरण बनेंगे ‘प्रीमियम’ निर्धारण का आधार
आपकी कलाई पर बंधी स्मार्टवॉच अब केवल समय नहीं बताती, बल्कि यह तय कर सकती है कि आपकी बीमा प्रीमियम कितनी होगी। जो लोग नियमित रूप से व्यायाम करते हैं, हेल्दी खाना खाते हैं और नींद पूरी करते हैं, उन्हें अब बीमा कंपनियाँ “फिटनेस रिवॉर्ड्स” दे रही हैं। मतलब यह कि जितना अच्छा स्वास्थ्य, उतनी कम प्रीमियम।
“ये एक सकारात्मक बदलाव है, जहां बीमा पॉलिसी धारक को न सिर्फ बीमा मिल रहा है, बल्कि स्वास्थ्य के प्रति जागरूक भी किया जा रहा है,” कहते हैं डॉ. अंकित मेहता, वरिष्ठ हेल्थ पॉलिसी विशेषज्ञ।
लेकिन क्या यह डेटा सुरक्षित है?
यह सवाल अब तेजी से उठ रहा है कि जो व्यक्तिगत डेटा बीमा कंपनियाँ इकठ्ठा कर रही हैं, उसका इस्तेमाल कहाँ और कैसे हो रहा है? क्या ग्राहक की जानकारी उसकी सहमति के बिना शेयर की जा रही है?
IRDAI (बीमा नियामक) और डिजिटल मंत्रालय ने ऐसे मामलों पर निगरानी शुरू कर दी है। हाल ही में कुछ बीमा कंपनियों को चेतावनी भी दी गई कि ग्राहक के स्वास्थ्य डेटा की सुरक्षा में कोई ढील बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
निवेशकों की नज़र भी AI पर
AI की वजह से बीमा कंपनियों का ऑपरेशन तेज़ और किफायती हुआ है, जिससे निवेशकों का रुझान भी इस सेक्टर की ओर बढ़ा है। हेल्थटेक और फिनटेक कंपनियों में हो रहे निवेश से साफ है कि आने वाला समय बीमा क्षेत्र के लिए आर्थिक दृष्टि से भी अनुकूल रहने वाला है।
PolicyBazaar, Turtlemint, और OneAssure जैसी डिजिटल बीमा कंपनियाँ अब बीमा को “डिजिटल फ्रेंडली” बना रही हैं, जिससे मध्यम वर्ग भी आकर्षित हो रहा है।
स्वास्थ्य बीमा अब सिर्फ कागज़ी प्रक्रिया नहीं रही। यह एक “डेटा आधारित व्यक्तिगत सेवा” बन चुकी है। लेकिन इस सुविधा के साथ-साथ खतरे भी हैं — खासकर अगर डेटा लीक हुआ या गलत हाथों में गया।
इसलिए अब सवाल केवल यह नहीं है कि “आपको कौन-सी बीमा पॉलिसी चाहिए?” बल्कि यह भी है कि “आप अपना डेटा किस पर भरोसे से सौंप सकते हैं?“




