अमेरिका में हेल्थ इंश्योरेंस की मांग लगातार बढ़ रही है। कोरोना महामारी के बाद अमेरिकी नागरिकों में स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर जागरूकता काफी बढ़ी है। इस बीच भारतीय हेल्थ-टेक और इंश्योरेंस कंपनियों के पास अमेरिकी बाजार में अपने पैर जमाने का यह एक बेहतरीन अवसर है।
बढ़ती प्रीमियम दरें और अवसर
नेशनल हेल्थ इंटरव्यू सर्वे (NHIS) के अनुसार, 2024 में अमेरिका में हेल्थ इंश्योरेंस की औसत मासिक प्रीमियम दर $560 तक पहुंच गई है। इससे भारतीय डिजिटल इंश्योरेंस प्लेटफॉर्म्स जैसे PolicyBazaar, Niva Bupa और Digit Insurance को B2B और B2C सेवाओं के लिए नए ग्राहक वर्गों को लक्षित करने का मौका मिल सकता है।
भारतीय कंपनियों की रणनीति
- PolicyBazaar ने हाल ही में NRI ग्राहकों के लिए खास हेल्थ प्लान लॉन्च किए हैं।
- Niva Bupa विदेशी नागरिकों के लिए India Visit Coverage प्लान पर फोकस कर रही है।
- Tata AIG और HDFC ERGO ने अमेरिका आधारित क्लिनिक नेटवर्क के साथ करार किया है।
विदेशी निवेश और रेगुलेटरी सपोर्ट
वर्तमान में अमेरिकी हेल्थकेयर इंडस्ट्री $4 ट्रिलियन से अधिक की है और इसमें विदेशी निवेश के लिए पर्याप्त अवसर हैं। भारतीय सरकार ने भी “International Financial Services Centres Authority” (IFSCA) के माध्यम से हेल्थ इंश्योरेंस एक्सपोर्ट को बढ़ावा देना शुरू किया है।
विशेषज्ञों की राय
स्वास्थ्य विशेषज्ञों और आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि भारत की तकनीक-आधारित इंश्योरेंस सेवाएं अमेरिकी बाजार में एक सस्ती और भरोसेमंद विकल्प बन सकती हैं।
“इंडियन हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों के पास अब अमेरिका जैसे विकसित बाजारों में सेंध लगाने का समय आ गया है,” – डॉ. राकेश मिश्रा, स्वास्थ्य नीति विशेषज्ञ
जैसे-जैसे अमेरिका में हेल्थ इंश्योरेंस की मांग बढ़ती जा रही है, भारतीय कंपनियों को अब ग्लोबल सोच और लोकल एक्शन के साथ अपने कदम बढ़ाने की आवश्यकता है। यह न केवल उनके लिए आर्थिक लाभ का मौका है, बल्कि भारत को एक हेल्थ-टेक सुपरपावर के रूप में स्थापित करने की दिशा में भी बड़ा कदम साबित हो सकता है।