पटना: लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान एक बार फिर बिहार की राजनीति में बड़ी भूमिका निभाने की तैयारी में हैं। एनडीए गठबंधन में अपनी पकड़ मजबूत करने के उद्देश्य से उन्होंने आगामी विधानसभा चुनावों के लिए 45 सीटों की मांग रखी है। इसके साथ ही उनके समर्थकों में यह चर्चा भी तेज़ हो गई है कि चिराग आने वाले समय में उपमुख्यमंत्री पद की ओर कदम बढ़ा सकते हैं।
🗂️ 45 सीटों की मांग क्यों?
- चिराग पासवान ने 2025 के बिहार विधानसभा चुनावों के लिए एनडीए से 45 सीटों की हिस्सेदारी की मांग की है।
- उनका तर्क है कि LJP (रामविलास) का युवाओं और दलित वर्ग में मजबूत जनाधार है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
🤝 एनडीए के भीतर समीकरण
- बीजेपी और जेडीयू के साथ मिलकर चल रही बातचीत के दौरान चिराग ने स्पष्ट किया कि वे ‘सम्मानजनक सीट बंटवारे’ के बिना समझौता नहीं करेंगे।
- सूत्रों के अनुसार, भाजपा फिलहाल चिराग की मांग को ‘प्रारंभिक प्रस्ताव’ मान रही है और मोलभाव की गुंजाइश रख रही है।
🎯 उपमुख्यमंत्री बनने की रणनीति?
- चिराग पासवान की हालिया सक्रियता को देखते हुए राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि वे भविष्य में डिप्टी सीएम पद की मांग कर सकते हैं।
- युवा चेहरे और तेज़-तर्रार नेता के रूप में चिराग खुद को राज्य नेतृत्व में स्थापित करना चाहते हैं।
📊 2020 का प्रदर्शन
- पिछली बार LJP (रामविलास) ने जेडीयू के खिलाफ एकतरफा लड़ाई लड़ी थी और हालांकि सीटें कम मिलीं, लेकिन कई क्षेत्रों में जेडीयू को नुकसान पहुंचाया था।
- इस बार रणनीति बदली हुई है — एनडीए के भीतर रहते हुए अधिक प्रभाव हासिल करना।
🗣️ चिराग का बयान
“हम बिहार में युवाओं और दलितों की आवाज़ हैं। हमारा लक्ष्य सत्ता में भागीदारी और बदलाव लाना है।” – चिराग पासवान
चिराग पासवान की यह रणनीति केवल सीटों के बंटवारे तक सीमित नहीं है। वे खुद को भविष्य के मुख्यमंत्री पद के संभावित दावेदार के रूप में पेश करना चाहते हैं।
अगर एनडीए में उनकी मांगों को पर्याप्त समर्थन मिला, तो यह कहना गलत नहीं होगा कि आने वाले वर्षों में चिराग बिहार की राजनीति का बड़ा चेहरा बन सकते हैं।
चुनावी गणित, जातीय समीकरण और गठबंधन की राजनीति में चिराग पासवान का यह दांव कितना सफल होगा, यह आने वाला वक्त बताएगा। लेकिन एक बात तय है — बिहार की राजनीति अब पहले जैसी नहीं रहने वाली।
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