नई दिल्ली: सरकार का मानना है कि भारत 2030 तक 500 गीगावॉट नॉन‑फॉसिल ऊर्जा क्षमता हासिल करने के अपने लक्ष्य की दिशा में अच्छी‑खासी प्रगति कर रहा है। इसका मतलब है कि सोलर, विंड, हाइड्रो और न्यूक्लियर जैसे क्लीन ऊर्जा स्रोतों से बिजली पैदा करने की क्षमता को बड़े पैमाने पर बढ़ाया जा रहा है।
आज देश में लगभग 260 GW नॉन‑फॉसिल पावर क्षमता पहले से मौजूद है। इसका मतलब है कि अब लगभग 240 GW और क्षमता जोड़नी बाकी है, जिसे अगले कुछ सालों में पूरा करना सरकार के मुताबिक मुमकिन लग रहा है।
सोलर ऊर्जा को इस विस्तार में सबसे बड़ा योगदान देने वाला माना जा रहा है — सोलर में लगभग 160 GW नई क्षमता जोड़ने की योजना है। इसके अलावा विंड ऊर्जा से करीब 30 GW, और हाइड्रो तथा न्यूक्लियर प्रोजेक्ट्स से बाकी की क्षमता जुड़ने की उम्मीद है। खास तौर पर न्यूक्लियर पावर से लगभग 8‑10 GW तक की ऊर्जा मिलने की संभावना बताई जा रही है।
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, अगर बड़े डेटा सेंटर और अन्य इंडस्ट्री प्रोजेक्ट समय पर आगे बढ़ते हैं, तो 500 GW के लक्ष्य को न केवल हासिल किया जा सकता है, बल्कि उससे आगे भी बढ़ा जा सकता है। डेटा सेंटर जैसे सेक्टर में बिजली की मांग तेजी से बढ़ रही है और कई इंडस्ट्रीज़ क्लीन एनर्जी की ओर शिफ्ट हो रही हैं, जिससे लक्ष्य पूरा करना और आसान होता दिखता है।
पिछले कुछ सालों में नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में तेज़ी से इजाफा हुआ है और नए प्रोजेक्ट्स रिन्यूएबल ऊर्जा के विस्तार को आगे बढ़ा रहे हैं।



