बिहार में विधानसभा चुनाव का माहौल बनना शुरू हो गया है। इसी बीच असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने चुनावी रण में
एक बड़ा ऐलान कर दिया है। पार्टी ने कहा है कि वह इस बार करीब 100 सीटों पर उम्मीदवार उतारेगी।
ओवैसी ने शुक्रवार को कहा,
“हम सीमांचल तक सीमित नहीं रहेंगे।
बिहार के हर उस हिस्से में लड़ेंगे, जहाँ जनता हमें मौका देना चाहती है।”
पार्टी की पहली सूची में किशनगंज, ठाकुरगंज, बहादुरगंज और कोचाधामन जैसी सीटें शामिल हैं।
इन इलाकों में AIMIM को पहले से जनसमर्थन मिला हुआ है।
सीमांचल से शुरू हुई यात्रा, राज्यभर तक विस्तार की तैयारी
ओवैसी ने कुछ दिन पहले ‘सीमांचल न्याय यात्रा’ की शुरुआत की थी। इस यात्रा के ज़रिए वह लोगों से सीधे जुड़ने की कोशिश कर रहे हैं। पार्टी का कहना है कि यात्रा के दौरान जनता के मुद्दों को समझा गया है और अब उसी के आधार पर चुनावी रणनीति तैयार की जा रही है।
पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अख़्तरुल इमान ने कहा कि
AIMIM किसी गठबंधन का हिस्सा नहीं बनेगी। उन्होंने कहा, “हम जनता के भरोसे पर उतरेंगे, किसी दल के सहारे पर नहीं।”
राजनीतिक समीकरणों में हलचल
AIMIM का यह फैसला बिहार के सियासी गणित में नई हलचल पैदा कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि पार्टी की एंट्री से मुस्लिम वोट बैंक में विभाजन हो सकता है, जिसका असर RJD और कांग्रेस जैसे दलों पर पड़ सकता है। हालाँकि, AIMIM के सामने चुनौती भी कम नहीं है। 100 सीटों पर मजबूत उम्मीदवार खड़ा करना और हर इलाके में संगठन तैयार करना आसान काम नहीं होगा।
ओवैसी की मंशा साफ़ — “तीसरा विकल्प” बनने की कोशिश
ओवैसी लगातार इस बात पर ज़ोर देते आए हैं कि AIMIM अब केवल एक “क्षेत्रीय पार्टी” नहीं, बल्कि तीसरे विकल्प के रूप में खुद को पेश करना चाहती है। उनकी कोशिश है कि सीमांचल के बाहर भीपार्टी की पहचान बने और नई ज़मीन तैयार हो।
नतीजा क्या होगा, ये जनता तय करेगी
ओवैसी की पार्टी की इस घोषणा से राज्य की राजनीति में नई चर्चाएँ शुरू हो गई हैं। अब देखना होगा कि जनता इस कोशिश को कितना स्वीकार करती है और क्या AIMIM वाकई इस चुनाव में कोई बड़ा असर ।




