दिल्ली सरकार ने संपत्ति सर्किल रेट में बदलाव की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसका मकसद है कि वर्तमान बाजार के अनुसार रेट तय किया जाए और लेन-देन में पारदर्शिता आए।
सर्किल रेट क्या है?
सर्किल रेट वह न्यूनतम दर है जिस पर किसी संपत्ति की रजिस्ट्री हो सकती है।
हर इलाके के लिए ये अलग होता है। उदाहरण के लिए, दिल्ली के महंगे इलाकों में यह रेट ज़्यादा होता है, जबकि बाहरी इलाकों में कम।
बदलाव क्यों जरूरी है?
दिल्ली में जमीन और प्रॉपर्टी की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन सर्किल रेट पुराना होने की वजह से सरकार को सही राजस्व नहीं मिल रहा।
इससे संपत्ति लेन-देन में भी पारदर्शिता कम हो रही है।
जनता कैसे सुझाव दे सकती है?
दिल्ली सरकार ने आम लोगों से सुझाव मांगे हैं।
आप ईमेल के माध्यम से अपने विचार भेज सकते हैं।
अंतिम तिथि: 15 अक्टूबर 2025
सुझाव देने से पहले अपने इलाके का मौजूदा सर्किल रेट जान लेना जरूरी है।
बदलाव का असर
- पारदर्शिता बढ़ेगी: रेट मार्केट के अनुसार होगा, जिससे असली कीमत पता चलेगी।
- राजस्व में वृद्धि: सरकार को उचित रेट के हिसाब से ज्यादा आय होगी।
- संपत्ति की कीमतें: रेट बढ़ने से मार्केट में कीमतें भी प्रभावित हो सकती हैं।



