मीणा की छुट्टी से पहले ही प्रत्यय अमृत की ताजपोशी, नीतीश बाबू ने फिर चौंकाया

पटना, 4 अगस्त 2025:

अभी अमृत लाल मीणा साहब अपने रिटायरमेंट की उल्टी गिनती ही गिन रहे थे, नीतीश कुमार ने उनके जाने से पूरे 27 दिन पहले ही अगला मुख्य सचिव घोषित कर दिया। प्रत्यय अमृत—नाम याद रखिएगा, ये बंदा अब बिहार का नया ‘बॉस ऑफ ब्यूरोक्रेसी’ बनने वाला है। और हां, ये सब विधानसभा चुनावों के ठीक पहले हुआ है, तो आप समझ ही सकते हैं न, सियासी तड़का लगना तय है।

राज्य सरकार का नोटिफिकेशन आया सोमवार शाम—”भाई लोग, 1 सितंबर से अमृत साहब की जगह प्रत्यय अमृत संभालेंगे।” अमृत लाल मीणा जी 31 अगस्त को ऑफिस को टाटा-बाय-बाय बोल देंगे। लेकिन असली ट्विस्ट ये है कि प्रत्यय अमृत को अभी से OSD (स्पेशल ड्यूटी वाला अफसर) बनाकर मुख्य सचिव के दफ्तर में बिठा दिया गया है। रिहर्सल शुरू, समझे?

आमतौर पर क्या होता है? नया चीफ सेक्रेटरी दो-तीन दिन पहले ही घोषित होता है, ताकि पुराना वाला अपना सामान समेटे और निकल ले। लेकिन इस बार नीतीश सरकार ने टाइम से पहले ही सब फाइनल कर डाला। कुछ लोग इसे ‘पारदर्शिता’ बता रहे हैं, मगर भाई, चुनावों के टाइम ऐसा कुछ भी हो तो उसकी ‘राजनीति’ भी खोजी जाती है!

प्रत्यय अमृत कौन हैं? और क्यों इतनी चर्चा?

तो देखो, प्रत्यय अमृत साहब, 1991 बैच के IAS हैं। अभी तक बिहार के डेवलपमेंट कमिश्नर थे—मतलब ब्यूरोक्रेसी का दूसरा सबसे बड़ा पोस्ट। साथ में हेल्थ और डिजास्टर मैनेजमेंट वाले डिपार्टमेंट के भी अपर मुख्य सचिव हैं। बंदे का रिकॉर्ड तगड़ा है, और नीतीश कुमार के ‘विश्वस्त’ अफसरों की लिस्ट में टॉप पर हैं। कह सकते हैं, नीतीश बाबू जहां जाते हैं, प्रत्यय अमृत पीछे-पीछे!

चुनावी चाल या बस अफसरशाही की तैयारी?

अब भाई, चुनाव आने वाले हैं, तो हर फैसले में सियासी मतलब ढूंढना तो बनता है। लोग पूछ रहे हैं—क्या ये अर्ली अनाउंसमेंट बस सिस्टम को स्मूथ रखने के लिए है, या फिर इसके पीछे कोई चुनावी दांव छिपा है? वैसे चीफ सेक्रेटरी का पद सिर्फ फाइलों पर दस्तखत करने का नहीं होता, पॉलिसी और पॉलिटिक्स दोनों को सेट करने का काम है। ऐसे में, प्रत्यय अमृत जैसे भरोसेमंद बंदे को पहले से तैयार बैठा देना… नीतीश कुमार का ‘मास्टरस्ट्रोक’ भी हो सकता है। कौन जाने!

सियासी गलियारों में हलचल

चुनाव की तारीख़ें अभी आई नहीं, लेकिन नेतागण अभी से मैदान में हैं। अब ऐसे वक्त पर चीफ सेक्रेटरी की ताजपोशी—वो भी समय से पहले—लोग कह रहे हैं, ये भी एक तरह का पॉलिटिकल मैसेज है। नीतीश बाबू वैसे भी अपने अफसरों का ‘म्यूजिकल चेयर’ खेलते रहते हैं, पर इस बार टाइमिंग ने हर किसी का ध्यान खींच लिया है। OSD बनाकर प्रत्यय अमृत को ‘ऑन द जॉब ट्रेनिंग’ मिल रही है ताकि 1 सितंबर आते-आते वो फुल-फ्लेज्ड मुख्य सचिव बनकर ताल ठोक सकें।

अमृत लाल मीणा: शांत कप्तान, बिना हंगामे के

अब जरा पुराने कप्तान अमृत लाल मीणा की बात करें—उनका कार्यकाल बिना ज्यादा शोर-शराबे के निकल गया। हां, कभी-कभी विभागीय कॉर्डिनेशन को लेकर गड़बड़ जरूर हुई, पर कोई बड़ा बवाल नहीं हुआ। अब उनकी जगह जो आ रहे हैं, वो फील्ड की नब्ज़ पकड़ना जानते हैं, पॉलिसी भी लागू करवा लेते हैं। नीतीश कुमार ने ‘एक्सपीरियंस्ड प्लेयर’ ही फिल्ड में उतारा है।


कुल मिलाकर, बिहार में मुख्य सचिव की समय से पहले घोषणा सिर्फ एक सरकारी आदेश नहीं, बल्कि बड़ा सियासी इशारा है। प्रत्यय अमृत की एंट्री, नीतीश कुमार के चुनावी होमवर्क का हिस्सा लग रही है। अब ये फैसला महज योग्यता पर आधारित है या इसके पीछे कोई पॉलिटिकल खिचड़ी पक रही है—ये तो वक्त बताएगा। फिलहाल इतना समझ लीजिए, बिहार का सियासी पारा ऊपर चढ़ने वाला है, और नीतीश बाबू अपनी चालें खेलने में माहिर हैं!

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