पुरी में आज फिर वही दिवानगी – जगन्नाथ जी की ‘बहुड़ा यात्रा’ यानि वापसी रथ यात्रा का रंग चढ़ चुका है। भाई, क्या नजारा है! भीड़ का तो पूछो मत, हर तरफ बस भक्त ही भक्त। पुलिस भी पूरी फुल फॉर्म में है – किसी को कुछ भी गड़बड़ करने का मौका नहीं मिलेगा, ऐसा टाइट इंतजाम किया गया है।
अब परंपरा की बात करें तो, देवताओं को रथों पर बैठाकर गजपति दिव्यसिंह देब खुद दोपहर करीब 2.30 से 3.30 बजे के बीच ‘छेरा पहनरा’ (रथों की झाड़ू-पोछा वाली रस्म) अदा करेंगे। वैसे टाइमटेबल तो चार बजे रथ खींचना है, लेकिन यहां सब भक्तों के जोश पर डिपेंड करता है – कभी-कभी जल्दी भी हो जाता है।
‘पहांडी’ रस्म के साथ सुबह से ही मूर्तियों को श्री गुंडिचा मंदिर से उठाकर रथों तक पहुंचाया गया। बलभद्र, सुभद्रा और जगन्नाथ – तीनों देवताओं को उनके रथों (तलध्वज, दर्पदलन और नंदीघोष) पर बिठाया गया। फिर शुरू होगी ये 2.6 किलोमीटर की ग्रैंड यात्रा, जो सीधे 12वीं शताब्दी के जगन्नाथ मंदिर तक जाती है।
याद है न, कुछ दिन पहले 29 जून को भगदड़ मच गई थी – तीन लोगों की मौत, 50 घायल। उसी वजह से इस बार सिक्योरिटी को लेकर कोई चांस नहीं ले रहे। ओडिशा के सीएम मोहन माझी और विपक्ष के नेता नवीन पटनायक – दोनों ने बहुड़ा यात्रा के लिए लोगों को शुभकामनाएं भी दे डाली हैं।
मंगल आरती, मैलम – सब पारंपरिक अनुष्ठान सुबह-सुबह हो गए। सबसे पहले चक्रराज सुदर्शन को बाहर निकाला गया, फिर बलभद्र और सुभद्रा को उनके-अपने रथों पर ले गए। आखिर में, जगन्नाथ जी की बारी आई – भाई, क्या शान है!
सिक्योरिटी डिटेल्स सुनो – 6000 पुलिसवाले, 800 CAPF के जवान – मतलब पूरी फौज तैनात। 275 AI वाले सीसीटीवी हर तरफ – कोई हिल भी गया तो कैमरा पकड़ लेगा। खुद DGP खुरानिया साहब मौके पर हैं – बोले, “हर संभव कोशिश कर ली है, सब स्मूथ चलेगा।”
एक लाइन में – पुरी आज फिर इतिहास रच रहा है। भक्तों का जोश, परंपरा का रंग और सुरक्षा का दम – सब एक साथ!
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